Kumar Viswas Poem

Kumar Viswas Poem

Kumar Viswas Poem

Saurabh Tripathi / August 1, 2018

Kumar Viswas Poem

सखियों संग रंगने की

  • सखियों संग रंगने की धमकी सुनकर क्या डर जाऊँगा?

तेरी गली में क्या होगा ये मालूम है पर आऊँगा,

भींग रही है काया सारी खजुराहो की मूरत सी,

इस दर्शन का और प्रदर्शन मत करना, मर जाऊँगा..!!

 

इकरार कहा आएगा

  • एक दो दिन में वो इकरार कहा आएगा

    हर सुबह एक ही अखबार कहा आएगा

    आज बंधा है जो इन् बातों में तो बहाल जायेंगे

    रोज इन बाहों का त्यौहार कहा आएगा..!!

 

मुझे सारा ज़माना चाहे

  • उसी की तरहा मुझे सारा ज़माना चाहे,

    वो मेरा होने से ज्यादा मुझे पाना चाहे,

    मेरी पलकों से फिसल जाता है चेहरा तेरा,

    ये मुसाफिर तो कोई ठिकाना चाहे..!!

 

जो खामोश इतना है

  • हमारे शेर सुन कर भी जो खामोश इतना है

    खुदा जाने गुरूर-ए-हुस्न में मदहोश कितना है

    किसी प्याले से पुछा है सुराही मैं सबब में का

    जो खुद बेहोश हो वो क्या बताये के होश कितना है..!!

 

हंगामा

  • क़लम को खून में खुद के डुबोता हूँ तो हंगामा,

गिरेबां अपना आँसू में भिगोता हूँ तो हंगामा,

नहीं मुझ पर भी जो खुद की ख़बर वो है ज़माने पर,

मैं हँसता हूँ तो हंगामा, मैं रोता हूँ तो हंगामा…!!

हिम्मत ए रौशनी

  • हिम्मत ए रौशनी बढ़ जाती है,
    हम चिरागों की इन हवाओं से,
    कोई तो जा के बता दे उस को,
    चैन बढता है बद्दुआओं से…!!

आखिरी मेहमान

  • जिस्म का आखिरी मेहमान बना बैठा हूँ
    एक उम्मीद का उन्वान बना बैठा हूँ
    वो कहाँ है ये हवाओं को भी मालूम है मगर
    एक बस में हूँ जो अनजान बना बैठा हूँ…!!

सफर अच्छा नहीं लगता

  • कोई मंजिल नहीं जंचती, सफर अच्छा नहीं लगता,
    अगर घर लौट भी आऊ तो घर अच्छा नहीं लगता,
    करूं कुछ भी मैं अब दुनिया को सब अच्छा ही लगता है,
    मुझे कुछ भी तुम्हारे बिन मगर अच्छा नहीं लगता..!!

1 Comment

    • Saurabh TripathiPosted on : August 1, 2018 at 8:29 am

      Nice thinking sir …..

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